तेरे दर पे आये है

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे आये है,साईं जी साईं जी,

फूल संग में लाये है साईं जी साईं जी,

कुछ सुनाने आये है गीत गाने आये है,

अपने दिल का किस्सा बताने आये है,

तेरे दर पे आये है....

भीड़ लाखो की है तूने मुझको चुना,

इस भरी भीड़ में तुमने मुझको सुना,

मेरे कं कं में तुम हो दिखने आये है,

तेरे दर पे आये है.......

अपने दीवाने को तुमने मौका दिया,

कभी सोचा ना था साईं ये ना किया,

कितनी चाहत है तुमसे जताने आये है,

तेरे दर पे आये है........

मेरे दिल में रहो धड़कन में रहो,

जब ये जान निकले तुम पास रहो,

अपनी सांसो में तुम को समाने आये है,.

तेरे दर पे आये है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।