नाम प्रभु दा जप बंदेया

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

नाम प्रभु दा जप बंदेया,धन दौलत दा मान न करिये,

आखिर जाना मर बंदेया,नाम प्रभु दा जप बंदेया

नाम जपन नु जीबा दिति हरी दर्शन को अखि,

इक इक स्वांस अमोलक जावे हाथ न आव लखि,

मानस जन्म अमोलक पाया जपके सफला कर बंदेया,

नाम प्रभु दा जप बंदेया......

जिस देह नु देवते लोड़न सो देहि तुम पाई,

सच दी नेक कमाई कर ले मुकत हॉवे गा भाई,

नाम जपना ते वंड के छकना गन चँगाईयाँ कर बंदेया,

नाम प्रभु दा जप बंदेया..........

दर दर ते तू भटक न बंदे इक ईश्वर दा होजा,

न साई दा सिमर सिमर के मलजन माँ दा दूजा,

हीरे जैसा जन्म है तेरा कोड़ी मूल न कर बंदेया,

नाम प्रभु दा जप बंदेया.......

छड़ दे बंदेया झूठे दी पूजा नाल किसे ने नहीं जाना,

इको राम नहीं कोई दूजा कर उसदा शुकराना,

नाम अमोलक गुरु जी दा जप ला भवसागर जाए तर बंदेया,

नाम प्रभु दा जप बंदेया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।