श्याम बुलाए यमुना पार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम बुलाए यमुना पार राधे कब से निहारु तेरी राह रे,

श्याम बुलाए यमुना पार ...

श्याम कहे यमुना तट पर मीठी मीठी बाते करेंगे,

प्रेम की गंगा में अमृत की धरा जैसे हम तो बहेगे,

बहती ही जाये प्रेम धार राधे कब से निहारु तेरी राह रे,

श्याम बुलाए यमुना पार....

हम दोनों का प्रेम है ऐसा के जैसे चंदा चकोर का,

हम दोनों का मेल है ऐसा जैसे नदियां छोर का,

बंधन हमारा है अपार राधे कबसे निहारु तेरी राह रे,

श्याम बुलाए यमुना पार ...

मधुवनकी बड्गइयाँ में फूलो के रंगो संग हम तो रंगे गे,

हम दोनों के रंग में गोपी ग्वाले सब को रंगे गे,

लहराए मस्ती की बहार,

राधे कब से निहारु तेरी राह रे,

श्याम बुलाए यमुना पार

राधा कहे कान्हा आने को आप पर शर्म मुझे आये,

ना औ तो तेरे बिना मुझको कुछ भी ना भाये,

आना ही होगा यमुना पार,

कान्हा मैं आ रही हु तेरे पास रे,

श्याम बुलाए यमुना पार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।