श्यामा वे मेरी गागर भर दे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्यामा वे मेरी गागर भर दे,

गागर भर दे सिर उत्ते रख दे,

चार कदम संग चल दे,

एह ना समज में कली आयी,

नाल सहेली मेरे संग वे मेरी गागर भर दे,

श्यामा वे......

एह ना समज मेरा कोई ना सहारा ,

सतगुरु मेरे नाल संग वे मेरी गागर भर दे,

श्यामा वे......

एह ना समज मैं दुरो आयी,

घर मेरा कुन्ज गली दे विच वे मेरी गागर भर दे,

श्यामा वे......

एह ना समज मैं रंग दी काली,

गोरा चीटा मेरा रंग वे मेरी गागर भर दे,

श्यामा वे.......

एह ना समज मैं कवारी हैगी ,

श्याम सलोना मेरा वर वे मेरी गागर भर दे ,

श्यामा वे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।