सब से सुन्दर है हमारी जय अम्बे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सब से सुन्दर है हमारी जय अम्बे माँ !

जय अम्बे माँ -2 !

नदिया है सुन्दर, समंदर है सुन्दर

धरती के ऊपर का अम्बर है सुन्दर

सब से, सब से, सब से सुन्दर है हमारी जय अम्बे माँ !

चंदा है सुन्दर सितारे है सुन्दर

बागो में खिलाती बहारें है सुन्दर

सब से, सब से, सब से सुन्दर है हमारी जय अम्बे माँ !

हार है सुन्दर, सिंगर है सुन्दर

बारह महीनो के तैयोहार है सुन्दर

सब से, सब से, सब से सुन्दर है हमारी जय अम्बे माँ !

गीत है सुन्दर संगीत है सुन्दर

‘’लाटा की मैया से प्रीत है सुन्दर

सब से, सब से, सब से सुन्दर है हमारी जय अम्बे माँ !

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।