धीरे धीरे अँखियाँ माँ खोल रही है

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॥ पावन पाठ ॥

धीरे धीरे अँखियाँ माँ खोल रही है,

लगता है मईया कुछ बोल रही है,

दुनिया के नज़ारे तो बेजान लगते ,

सूरज चन्दा कौड़ी के समान लगते,

आत्मा में अमृत घोल रही है ,

लगता है मईया कुछ बोल रही है,

आएगी जरूर मईया आज सामने,

अपने भगतों का देखो हाथ थामने ,

मिलने का मौक़ा ये टटोल रही है ,

लगता है मईया कुछ बोल रही है ,

लागे ना नजर मुझे हो रही फिकर ,

हीरे और मोती से उतार दूँ नजर ,

क्या करूँ मेरा तो ऐसा जोर नहीं है,

लगता है मईया कुछ बोल रही है ,

बनवारी ऐसी तकदीर चाहिए ,

आत्मा में माँ की तस्वीर चाहिए ,

ऐसा ये असर दिल पे छोड़ रही है ,

लगता है मईया कुछ बोल रही है ,

भजन गायक - माधुरी मधुकर

संपर्क - 8902154970

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।