कागा बोलेया बनेरे उत्ते बैके

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कागा बोलेया बनेरे उत्ते बैके,

गुरुआ ने तनु याद करिया,

शेती चल ज़िंदे बड़े मंदिर तू,

गुरुआ ने तनु याद करिया,

याद गुरुआ दी आई आंख मेरी भर आई,

जिंद निमानी ने गुरा संग प्रीत लाई,

मैं ता जाना गुरु जी दे द्वार,

गुरुआ ने तनु याद करिया,

बिन भागा दर्शन नहीं हुँदा,

दर्श बिना मन बेपल हुँदा,

मैं ता जाना ते सी शीश झुकाना,

गुरुआ ने तनु याद करिया,

याद गुरुआ दी आई आंख मेरी भर आई,

जींद निमणि ने गुरा संग प्रीत लाई,

मैं ता जाना गुरा दे द्वार,

गुरुआ ने तनु याद करिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।