तूने जितना दिया है साईंनाथ

पारंपरिक
श्री राम भजन साईं भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तूने जितना दिया है साईंनाथ,

औकात मेरी इतनी ना थी,

तूने रखली ओ देवा मेरी बात बिसाथ मेरी इतनी न थी,

मेरी हर साँस तुझको कहे शुक्रियां,

तूने भुजने दिया न सबर का दीया,

मेरी आँखों में बाबा नमी न रही,

अब किसी चीज की भी कमी न रही,

जितनी रेहमत की है बरसात औकात मेरी इतनी न थी,

तूने जितना दिया साईंनाथ.......

मैंने मन के ना फेरे तेरे नाम के,

फिर भी रख ली कलाई मेरी थाम के,

बनके मोहन कभी रूप में राम के सारे संधान दिए तूने आराम के,

सिर पे रखना सदा अपना हाथ औकात मेरी इतनी न थी,

तूने जितना दिया साईंनाथ.......

तेरे दर से सिर ये मेरा जुड़ गया,

बद नसीबी का पंक्षी कही उड़ गया,

चार आंसू बहाये तेरे सामने तेरी रेहमत का दरिया इधर मूड गया,

मैंने मन चाही पा ली मुराद औकात मेरी इतनी ना थी,

तूने जितना दिया साईंनाथ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।