प्यार का नाता साईं से

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

प्यार का नाता साईं से,

टुटा है न तोड़े गे,

मर कर भी साई पिया तेरा दामन न छोड़े गे,

तेरे हवाले कर दिया हम ने,

अपन साई तन मन,

शांत करो आबाद करो मेरे दिल का गुलशन,

तेरे रंग में रंगी चुनरियाँ,

अपने सिर पे ओढे गे,

मर कर भी साई पिया तेरा दामन न छोड़े गे,

गैरो की क्या बात करे हम अपने भी मुँह मोड़ चले,

मतलब के ये संगी साथी साथ हमारा छोड़ चले,

टूटे मेरे दिल के टुकड़े साई आप ही जोड़े गे,

मर कर भी साई पिया तेरा दामन न छोड़े गे,

तेरी रहो पे चलने को घर से अपने निकल पड़े,

आग का दरिया राहो के पत्थर आँख अपनी बदल पड़े,

तूफानों को अब रस्ते से साई आप ही मोड़ेगे,

मर कर भी साई पिया तेरा दामन न छोड़े गे,

भीड़ फ़िरश्तो की भी साई दर पे तेरे लगी हुई,

नूरानी किरणों से साई महफ़िल तेरी सजी हुई,

दिल के तारो का ये रिश्ता हरगिज न हम तोड़े गे,

मर कर भी साई पिया तेरा दामन न छोड़े गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।