रटो पार्वती के भरतार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रटो पार्वती के भरतार,करेंगे भव से बेड़ा पार ,

शिव नंदे के असवार, करेंगे भव से बेड़ा पार,

कैलाश के राजा आप महाराजा, शोभा बरनी न जाई ,

गौरा संग में बाए अंग में, शेषनाग लिपटाए,

जाता जूट में गंग की धार, करेंगे भव से बेड़ा पार ,

भष्मासुर सुर को दे दिया हरी ने, भष्म कड़ा अतिभारी,

वो दीवाना सोचे दाना, हर ल्यु शिव कि नारी ,

लिया मन में कपट विचार ,करेंगे भव से बेड़ा पार,

शम्भू भाग्या डर जब लाग्या, तीन लोक घबराये ,

देवो ने जब माया पलटी, विष्णु प्रकट हो आये ,

लिया रूप मोहिनी धार, करेंगे भव से बेड़ा पार,

सीताराम राधेश्याम , रटता माला तेरी,

आया शरण में पड्या चरण में लाज राखियो म्हारी,

शिव निराधार आधार, करेंगे भव से बेड़ा पार,

जय शंकर की....

जय श्री नाथजी की.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।