कंजका दें हुलारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सोहन दा महीना मेले मंदिरा ते लगे दर जगमग मारे लिश्कारे,

माँ पीपली ते पींग झूटदी माँ नु कंजका दें हुलारे पीपली ते पींग झूट दी,

किकलियाँ पौंडियां ने बन बन जोतियाँ,

कंजका नाल खेल्दी माँ गेंद अते गोटियां,

तू भी बड़बड़वाला ते दीदार माँ दे पा ले,

मुद मिलने नहीं अज़ाब नजारे,

माँ पीपली ते पींग झूटदी....

देव घन ऋषि मुनि संत की महात्मा,

गद गद होगी आज सरियाँ दी आत्मा,

शीश इन्दर झुकावे अमृत बरसावे,

हूँ गांदे चन सूरज ते तारे

माँ पीपली ते पींग झूटदी....

हीरे दी कलम करे गलती माँ रोकड़ी,

खेड़ दी नु खेड़ा एह तबर तीन लोक दी,

जग उते कली निगहा रख दी सवली,

जग जननी दे खेल न्यारे,

माँ पीपली ते पींग झूटदी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।