रेहम नजर करो अब मोरे साई

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

रेहम नजर करो अब मोरे साई,

रेहम नजर करो अब मोरे साई,

तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई,

मैं अँधा हु बंदा तुम्हारा,

मैं ना जानू आल्हा इलाही,

रेहम नजर करो अब मोरे साई,

तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई,

खली ज़माना मैंने गवाया,

साथी आखिर का किया न कोई,

रेहम नजर करो अब मोरे साई,

तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई,

अपने मजीद का झाड़ू घनोह है,

मालिक हमारे तुम बाबा साई,

रेहम नजर करो अब मोरे साई,

तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई,

साई मंजिल है बांवरा है राही,

जीने की राह दिखा दे ओ साई,

रेहम नजर करो अब मोरे साई,

तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।