दूल्हा बने रे नन्दलाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दूल्हा बने रे नन्दलाल के रुक्मणि दुल्हन बनी,

दुल्हन बानी दुल्हन बनी,

दूल्हा बने रे नन्दलाल...

रुक्मणि पहनी है सतरंगी साड़ी,

पीताम्बर नन्दलाल के रुक्मणि दुल्हन बनी,

दुल्हन बनी,दुल्हन बनी,

दूल्हा बने रे नन्दलाल

रुक्मणि पहने है मोतियन माला,

दूल्हा बैजंती माल के रुक्मणि दुल्हन बनी,

दुल्हन बनी,दुल्हन बनी,

दूल्हा बने रे नन्दलाल

हीरा जड़ा है हार है डाला,

ब्रिज से आया है ये गवाला,

छाया आनंद अपार के रुक्मणि दुल्हन बनी,

दुल्हन बनी,दुल्हन बनी,

दूल्हा बने रे नन्दलाल

रुक्मणि माहरी प्यारी लागे,

दूल्हा लगे रे कमाल के रुक्मणि दुल्हन बनी,

दुल्हन बनी,दुल्हन बनी,

दूल्हा बने रे नन्दलाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।