तू मेरा जीवन आसरा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तू मेरा जीवन आसरा मेरे शेहनशाह,

मेरियाँ अँखियाँ दे तारे,

मैं ते बस हुन जी रही आ एक तेरे सहारे,

तू मेरा जीवन आसरा मेरे शेहनशाह,

मेरियाँ अँखियाँ दे तारे,

फड़ी ए बाह दाता देवी तू छोड़ न,

फड़ी ए गुरु जी देवी तू छोड़ न,

चरना नाल लाइयाँ गुरु जी देवी विशोड न,

जड़ो दा अस्सा तनु जानिए रंग मान्या,

दुःख मिट गए सारे मैं ते बस हुन जी रही आ तेरे सहारे,

तू मेरा जीवन आसरा मेरे शेहनशाह,

मेरियाँ अँखियाँ दे तारे.....

अठे पेहर तेरियां गावा कहानियां,

चरना नाल लाइयाँ गुरु जी बड़ी मेहरबानियां,

करा गे तेरी मैं बंदगी सारि ज़िंदगी मेरे सतगुरु प्यारे,

मैं ते बस हुन जी रही आ इक तेरे सहारे,

तू मेरा जीवन आसरा मेरे शेहनशाह,

मेरियाँ अँखियाँ दे तारे,

अठे पेहर तेरा चड्या सरूर रहे,

कण कण दे विच गुरु जी तेरा ही नूर रहे,

करा गे तेरी मैं बंदगी सारि ज़िंदगी मेरे गुरु जी प्यारे,

मैं ते बस हुन जी रही आ इक तेरे सहारे,

तू मेरा जीवन आसरा मेरे शेहनशाह,

मेरियाँ अँखियाँ दे तारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।