आगई चलके हवाए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आगई चलके हवाए तेरे दीवाने तक,

अब येही लेके चले गी मुझे बरसाने तक,

आगई चलके हवाए .......

तुझको मैं भूले से भी भूल सकू न मुंकिन,

ये ताल लुक तो रहे मेरे मर जाने तक,

अब येही लेके चले गी मुझे बरसाने तक,

आगई चलके हवाए .......

मौत पर हक़ है मगर आखिरी ख्वाइश ये है,

साँस चलती रहे मेरी तेरे आ जाने तक,

अब येही लेके चले गी मुझे बरसाने तक,

आगई चलके हवाए .......

तुम तो अपने ये न थी तुमसे उम्मीद हमें,

कोई मरता हो तो आ जाते है बेगाने तक,

अब येही लेके चले गी मुझे बरसाने तक,

आगई चलके हवाए .......

किशोरी दास को आनंद तेरे नाम से है,

लाल रोता है माँ की गोद में सो जाने तक,

अब येही लेके चले गी मुझे बरसाने तक,

आगई चलके हवाए .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।