आया नहियो जांदा तेरे हुकम बेगैर वे

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॥ पावन पाठ ॥

जे तू भुलावे ते आइये नंगे पैर वे,

आया नहियो जांदा तेरे हुकम बेगैर वे,

तेरे हाथ डोर सैयां सारे संसार दी,

तेरी मर्जी ही दाता डोब दी या तार दी,

तू ही करे शाम ते सवेर ते दुपहर वे,

आया नहियो जांदा तेरे हुकम बेगैर वे,

सब न लई चैन ते करार तेतो मंगना,

सबना लाई प्यार बेशुमार तेतो मंगना,

मंगी मैं सरियाँ लाई दाता तेतो खैर वे,

आया नहियो जांदा तेरे हुकम बेगैर वे,

साढ़े वालो भूल कोई होइ ते विसार दे,

दर ते भुला के छींटे मेहरा वाले मार दे,

कोई भी नहीं अपना जेहो जेहा वे तू गैर वे,

आया नहियो जांदा तेरे हुकम बेगैर वे,

तेरा जे दीदार साहनु मिल जावे मलका,

दिल दा गुलाब खिल खिल जावे मालका,

धरती ते टिकने न फिर साहिल दे पैर वे,

आया नहियो जांदा तेरे हुकम बेगैर वे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।