जिस दिन गुरु जी तेरा दर्शन होगा,

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जिस दिन गुरु जी तेरा दर्शन होगा,

उस दिन सफल मेरा जीवन होगा,

मेरे मन के मंदिर में मैं तुझको बिठाऊ गा,

भाव भरे उपहार तेरे चरणों में चड़ाउ गा,

अंसुवन की धरा से परचन होगा,

जिस दिन गुरु जी तेरा दर्शन होगा,

तेरा मेरा रिश्ता गुरु जी बहुत है पुराना,

मुझको गुरु जी मेरे कभी न भुलाना

ध्यान तेरा जब निष् दिन होगा,

उस दिन सफल मेरा जीवन होगा,

जैसा भी कहो गए मुझको वैसा ही मंजूर है ,

दृष्टि दया की मेरे परवर भरपूर है,

तेरी किरपा से मन दर्पण होगा,

उस दिन सफल मेरा जीवन होगा,

मेरे मन के मंदिर में मैं तुझको बिठाऊ गा,

भाव भरे उपहार तेरे चरणों में चड़ाउ गा,

अंसुवन की धरा से परचन होगा,

जिस दिन गुरु जी तेरा दर्शन होगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।