ना ही किनारा ना ही सहारा

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ना ही किनारा ना ही सहारा,

किसी की न दरकार जो संग में तू मेरे,

जो संग में है तू मेरे,

ना ही किनारा ना ही सहारा,

क्या करना है किनारे का क्या करना है सहारे का,

भव से वो तो पार हुआ जो नौकर इस प्यारे का,

नदी किनारे नैया डूभी देखि सो सो बार प्रभु क्या खेल तेरे,

ना ही किनारा ना ही सहारा....

जिसपे भरोसा करते थे काम मेरे वो आएगा,

देगा मुझे सहारा वो नैया पार लगाए गा,

उनके चलते अटक गई थी नैया मेरी मझदार प्रभु क्या खेल तेरे,

ना ही किनारा ना ही सहारा

नैया ले मझधार खड़ा याद आई मुझे तब तेरी,

मेरे हाथ को थाम लिया पल भर भी न की देरी,

श्याम कहे उस दिन से मेरा बन गया पालन हार प्रभु क्या खेल तेरे,

ना ही किनारा ना ही सहारा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।