कदे भी सानु भूलना ना

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॥ पावन पाठ ॥

कदे भी सानु भूलना ना बाबा जी सानु भूलना ना,

तुसा भूल गए मैं रुल जाना मैं रुल के अथुरु वांग ढुल जाना,

कदे भी सानु भूलना ना......

तू याद रखे जे सहनु होर कुछ नही चाहिदा,

सतगुरु तुहाडे भगता नु होर कुछ नही चाहिदा,

अरदास एहो होवे साड़ी रवे सड़े वल तुहाडी,

कदे भी सहनु भूलना न बाबा जी सहनु भूलना न,

इंसान असी आ दाता करा गे गलतिया भी,

कर कर के गलतियाँ तेथो मंगा गे मफ्फियाँ भी,

सहनु माफ़ करी तू दाता निभावी नाल निमानिया नाता,

कदे भी सानु भूलना ना .......

सुख हॉवे या दुःख हॉवे सदा तेनु याद करा,

सुख विच तेरा शुकर मनावा दुख विच वि सिमरा,

कदे भूल के वी तेनु न भुला,

सदा तेरे प्यार दी तकड़ी तुला,

कदे भी सानु भूलना ना .......

सुख वध वध जांदा आपे ते दुःख घाट हो जांदा,

जद मेहर करे तू साइयां एह वक़्त खलो जन्दा,

इक एहो हॉवे तसली राखी साहिल ते नजर सवली,

कदे भी सानु भूलना ना ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।