कोयलिया बोली रे बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहीं रे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कोयलिया बोली रे,

अम्बुआ की डाल अपनो कोई नहींआ रे,

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ रे,

बाग लगाए बगीचा लगाए ,

और लगाए केला रे बालम और लगाए केला।,

जिस दिन राम प्राण निकल गयो रह गयो चांम अकेला,

अपना कोई नहींआ रे

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ,

कोयलिया बोली रे

अम्बुआ की डाल अपनो कोई नहींआ रे

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ रे,

तेंद नाहलो तिरिया रोबे ,

छमही नाहलो भाई रे बालम छमही नाहलो भाई,

जन्म-जन्म ओ माता रोबे, कर गयो आज पराई,

अपना कोई नहींआ रे,

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ,

कोयलिया बोली रे

अम्बुआ की डाल अपनो कोई नहींआ रे,

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ रे,

आज पचास बाराती आ गये, ले चल ले चल होई रे बालम

ले चल ले चल होई,

कहत कबीर सुनो भाई साधो जा गत सबकी होई

अपना कोई नहींआ रे

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ,

कोयलिया बोली रे

अम्बुआ की डाल अपनो कोई नहींआ रे

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ रे,

बाग लगाए बगीचा लगाए

और लगाए केला रे बालम और लगाए केला।

जिस दिन राम प्राण निकल गयो रह गयो चांम अकेला।

अपना कोई नहींआ रे

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ।

कोयलिया बोली रे

अम्बुआ की डाल अपनो कोई नहींआ रे ,

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ रे,

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ रे,

बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ रे,

Uploaded by -Pramod Meena,बीलखेडा भजन मंडली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।