इस संसार में तू अकेला आया है

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॥ पावन पाठ ॥

इस संसार में तू अकेला आया है अकेला जाएगा,

ये बोझ तेरा अपना तुझे ही उठाना है दूजा न उठाएगा,

माँ की ममता है बच्चे को दूध पिलाती,

खुद भूखी रह जाती बच्चे को खाना खिलाती,

बुढ़ापे में लेकिन क्या ये काम आएगा,

देखना वक़्त आने पे छोड़ चला जायेगा,

इस संसार में तू अकेला आया है........

चैन नहीं था तुझको जब तू भोजा ढो रहा था,

घर पहुंचा तेरा लाडला पालने में सो रहा रहा,

ये वक़्त है अब तो वह मरहम लगा दे,

जो कर्ज है तुझपर पर तू उसका सूत चूका दे,

इस संसार में तू अकेला आया है.............

उस प्यार को ठुकरा दिया जो बचपन से मिला,

उस प्यार को अपना लिया जो कल ही तुझे मिला,

जिस पेड़ की छाया में तूने जीवन बिताया,

उसकी साखा तू आज है तोड़ने आया,

इस संसार में तू अकेला आया है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।