नैनो से छलके प्यार ओ

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॥ पावन पाठ ॥

नैनो से छलके प्यार ओ बाबा नैनो से छलके प्यार,

पाए है सुख संसार ओ बाबा पाए है,

निर्मल निर्मल किरणे आती,

भाल पे है सोभाग्ये सजाती,

तिलक लगाती सदा विजय का,

शक्ति अनोखी है भर जाती,

प्यार से रहे निहार ओ बाबा,

नैनो से छलके प्यार ओ बाबा नैनो से छलके प्यार,

ऐसे पल फिर कब आये गे कल्प भर में ना पाएंगे,

प्यास भूजल युगो युगो की जन्म सफल हो जायेगे,

कितने किये उपकार ओ बाबा कितने दिए उपहार,

नैनो से छलके प्यार ओ बाबा नैनो से छलके प्यार,

वरदानो से सजा रहे हो अरमानो को खिला रहे हो,

सागर भर भर के थालियां ज्ञान रत्न तुम लुटा रहे हो,

हम पर तुम बलिहार ओ बाबा तुम पे हम बलिहार,

नैनो से छलके प्यार ओ बाबा नैनो से छलके प्यार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।