सब में तू है ना दूसरा कोई

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॥ पावन पाठ ॥

सब में तू है ना दूसरा कोई,

कैसे केहदूँ के है बुरा कोई।

पहले लगता था, अब नहीं लगता,

तुम में, मुझ मे है फासला कोई॥

हर जगह है खुदा तो पूछो भला,

क्यूँ खुदा को है पूजता कोई॥

कोई कैसे करे गुनाह अगर,

इलम हो के है देखता कोई॥

किस दिए से है सब दिए रोशन,

काश समझे यह सिलसिला कोई॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।