किसी लाचार मजबूर को देख लो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

किसी लाचार मजबूर को देख लो,

किसी लाचार मज़बूरी को देख लो,

मेरे शिर्डी साईं मिल जायेगे,

किसी रोते के आंसू को तुम पोंच लो,

मेरे शिर्डी के साईं मिल जायेगे,

किसी लाचार मजबूर को देखलो

दिल दुखाऊ गा मैं न किसी न कभी,

लेके ओरो के गम बांटनी है ख़ुशी,

भूखे को रोटी प्यासे को पानी दू,

खुशियो से भर दू मैं सब की ही ज़िन्दगी,

इतना मन में जरा सा ही तुम सोच लो,

मेरे शिर्डी के साईं मिल जायेगे......

जन्म जिसने दिया उनका आदर करो,

उनके विश्वाश का न निरादर करो,

उनकी आँखों से अनसु ना आये कभी,

उनका दिल न दुखे याद इंतना रखो,

उनके चरणों में जन्नत को तुम देख लो,

मेरे शिर्डी के साईं मिल जायेगे,

कर्म एसे करो सिर कभी न झुके,

मेरे साईं की किरपा कभी न रुके,

सारे कर्मो का फल मिलता है आज कल किसी हरकत से दिल न किसी का दुखे,

सबके दिल में ही तुम साईं को देख लो,

मेरे शिर्डी के साईं मिल जायेगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।