मैं चमकता हुआ सितारा हूँ

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं चमकता हुआ सितारा हूँ,

तन से न्यारा मैं प्रभु का प्यारा हु,

मैं चमकता हुआ सितारा हूँ,

गगन से धरती पर उतरा,

रूप और रंग है निखरा,

तेज चहु और है दिख रा,

मैं यहाँ से न्यारा हु,

मैं चमकता हुआ सितारा हूँ

सोने जैसा मन ये मेरा और तन भी सोने सा,

देव युग का वो नजारा पावन कोना कोना था,

शिव की पहली पहली रचना,

नैनो का मैं तारा हु,

मैं चमकता हुआ सितारा हूँ

है समय का खेल ऐसा कर्मो का ये मेल कैसा,

पूजनीय बन के पुजारी राह अपनी भुला हु,

मैं चमकता हुआ सितारा हूँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।