ज़िंदगी छोटी मिली है खुश रहो हर हाल में

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॥ पावन पाठ ॥

ज़िंदगी छोटी मिली है खुश रहो हर हाल में,

खुश रहो हर हाल में तुम खुश रहो हर हाल में,

ज़िंदगी छोटी मिली है खुश रहो हर हाल में,

जो हुआ हासिल उसी में मस्त हो अलमस्त हो,

बंदे उतना ही मिलेगा लो लिखा है भाल में,

ज़िंदगी छोटी मिली है खुश रहो हर हाल में,

खुशियों में हर पल बिताना ज़िंदगी का नाम है,

खुल के हसले आज प्यारे क्या पड़ा जन जाल में,

ज़िंदगी छोटी मिली है खुश रहो हर हाल में,

सांसो की सरगम पे रब के नाम की माला जपो,

क्या पता दे दिखाई सांसो की सुर ताल में,

ज़िंदगी छोटी मिली है खुश रहो हर हाल में,

बीता कल जो जा चूका है हरष है यादे बची,

आने वाला कल छुपा है वक़्त के ही काल में,

ज़िंदगी छोटी मिली है खुश रहो हर हाल में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।