आप के साथ रहना है बाबा हमें

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आप के साथ रहना है बाबा हमें आप के पास चलना है बाबा हमें,

तोड़ कर के मन के सारे बंधन छोड़ कर दुनिया के व्यर्थ चिंतन,

आप की गोद में पलना बाबा हमें,आप के पास चलना है बाबा हमें,

आप के साथ रहना है ....

हर घडी अब तो मुझको सुहानी लगे,

बीते जीवन की हर पल कहानी लगे,

अब तो दुनिया ही मुझको पुराणी लगे,

अब ज़मीन आसमान सब रूहानी लगे,

एक श्री मत पे चलना है बाबा हमें,

आप के पास चलना है बाबा हमें

महक रहे फूल बाबा के बगियन में,

चहके मन पंक्षी संगम के गलियां में,

बरसे ज्ञान आँगन के बाबा तेरे बतियाँ में,

चलके योग की यमुना मेरे अँखियाँ में,

जीवन गुणों से भरना है बाबा हमें,

आप के पास चलना है बाबा हमें....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।