कुझ ते मुख चो बोल वे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कुझ ते मुख चो बोल वे तेरे मिलने नु आई आ,

मिलने ने नु आई तेरे दर्शन नु आई आ,

मिलने नु आई सारे जग दी सताई आ,

कुझ ते मुख चो बोल वे तेरे मिलने नु आई आ,

मनिया मैं नाम वाला मनका नि मा रेया,

तु वि केह्डा पपिया नु फड फड न तरियां,

छड तकड़ी न तोल वे तेरे मिलने नु आई आ,

कुझ ते मुख चो बोल वे तेरे मिलने नु आई आ,

जद वी मैं आवा इक अखर नही बोल्दा,

जन्मा दी पापन तो खबरे की टोलदा,

कुझ नही मेरे कोल वे तेरे मिलने नु आई आ,

मिलने नु आई तेरे दर्शन नु आई आ....

तू बहारो काला ते मैं अंधरो काली,

चरना च रख ले वे हूँ न तू टाली,

अपने करदे मखोल वे तेरे मिलने नु आई आ...

मिटटी दी चिड़ियाँ ते सोने दा पिंजरा,

खुल्दा नि माया लगाया ऐसा ज़िन्दडा,

आपये अंध्रो खोल वे तेरे मिलने नु आई आ...

दुनिया च नचदी पर अंदरो उदासी,

झूठा हसदी है श्री हरिदासी,

जिंदगी डावा डोल वे तेरे मिलने नु आई आ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।