अँखियो में नमि सी हो

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अँखियो में नमि सी हो दिल बैठा हो हार के,

जब कुछ न नजर आये,

मुझे तू ही नजर आये,

जब गम के अंधेरे हो बंद हो सारे. रास्ते,

मुझे कुछ न नजर आये बस तू ही नजर आये,

अँखियो में नमि सी हो दिल बैठा हो हार के,

एक तू ही मेरी आस है,

एक तू ही सहारा तेरे नाम से बाबा मेरा चलता है गुजरा,

एक तेरे भरोसे पर सब बैठा हु हार के

उल्जन मेरे जीवन की एक तू ही तो सुलझाए,

अँखियो में नमि सी हो दिल बैठा हो हार के,

इस जग में प्रभु आप सा दानी नहीं है,

तेरे प्रेमियों के प्रेम का कोई साहनी नहीं है,

कोई प्रेमी तेरा मुझको देख के जब मुस्काये,

मुझे तू ही नजर आये बस तू ही नजर आये

अँखियो में नमि सी हो दिल बैठा हो हार के,

कभी सोचता है दिल मेरा तूने क्या क्या दिया है,

जिस चीज के लायक नहीं तूने वो भी दिया है,

तू ऐसा दयालु है छुले पत्थर जो प्यार से,

फूल उस में खिल जाये

अँखियो में नमि सी हो दिल बैठा हो हार के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।