तेरे दर पे आये है साई जी साई जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे आये है साई जी साई जी,

बोल संग में लाये है साई जी साई जी.

कुछ सुनाने आये है गीत गाने आये है,

अपने दिल का हर किसा बताने आये है,

तेरे दर पे आये है साई जी साई जी,

भीड़ लाखो की है तुमने मुझको चुना,

इस बड़ी भीड़ में तुमने मुझको सुना,

मेरे कण कण में तुम हो दिखाने आये है,

तेरे दर पे आये है साई जी साई जी,

अपने दीवाने को तुम ने मौका दिया,

कभी सोचा न साई ये क्या किया,

कितनी चाहता है तुम से जताने आये है,

तेरे दर पे आये है साई जी साई जी,

मेरे दिल में रखो धड़कन में रहो,

जब ये जान निकले तुम पास रहो,

अपने सांसो में तुम को समाने आये है,

तेरे दर पे आये है साई जी साई जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।