नज़रे श्याम से है जबसे मिलायी कश्ती भंवर से पार हुई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नज़रे श्याम से है जबसे मिलायी कश्ती भंवर से पार हुई l

किस्मत मेरी चमक गयी और बाते मेरी गुलज़ार हुई ll

नज़रे श्याम से है जबसे मिलायी कश्ती भंवर से पार हुई .......

जबसे लगन लगी श्याम नाम की तब से हुआ में दीवाना

जग की चमक अब मुझको न भये में चाहू दर तेरे आना

तेरे दीवाने तुझको बुलाये आने में फिर क्यों देर हुई

नज़रे श्याम से है जबसे मिलायी कश्ती भंवर से पार हुई .........

आँखों में कजरा और लटो में कलि घटा का बसेरा

सांवली सूरत मोहनी मूरत सावन रुत का सवेरा

जब से ये मुखड़ा दिल में खिला है दुनिया मेरी गुलजार हुई

नज़रे श्याम से है जबसे मिलायी कश्ती भंवर से पार हुई ........

यू तो ज़माने में मोह और माया के होते है रोज़ नज़ारे

पर उन्हें देख के देखा है जब तुम्हे तुम लगे और भी प्यारे

मोहित को तार दो ऐसी तम्मना एक नही कई बार हुई ll

नज़रे श्याम से है जबसे मिलायी कश्ती भंवर से पार हुई ..........

जय श्री श्याम ...................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।