जेल के खुल गये द्वार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जेल के खुल गये द्वार, जन्म लियो कान्हा ने,

सो गये पहरेदार, जन्म लियो कान्हा ने,

देवकी और वसुदेव के मन में, फूल खिले और मुरझाये,

ले जाओ इसे नंदगांव में, कंस कहीं न आ जाये,

करे देवकी देखो गुहार, जन्म लियो कान्हा ने,

वासुदेव ले कर कान्हा को, जेल से जब बाहर आये,

बिजलियाँ कड़क रही थीं नभ पे, काले थे बादल छाये,

हुआ गहरा था देखो अंधकार, जन्म लियो कान्हा ने,

वासुदेव धर टोकरी सर पे, उतर गये यमुना जल में,

मचल उठीं यमुना की लहरें, लगीं उछलने पल पल में,

देखो देखो रहीं पाँव पखार, जन्म लियो कान्हा ने,

उमड़ उमड़ घनघोर घटायें, लगीं बरसने मुस्का कर,

शेषनाग ने ढाँप लिया तब, कान्हा को फन फैला कर,

रहे कान्हा की छवि को निहार, जन्म लियो कान्हा ने,

नंदगांव में ढोल बजे और, गूंज रही शहनाईयां हैं,

नन्द बाबा और तशोदा माँ को, देवें सभी बधाईयां हैं,

देखो हो रहे मंगलाचार, जन्म लियो कान्हा ने,

नंदगाँव में पहुँच यशोदा, की कन्या को ले आये,

छोड़ दिया कान्हा को वहीं और, वापिस कारागार आये,

करने भक्तों का "दास" बेड पार, जन्म लियो कान्हा ने,

रचना अशोक शर्मा "दास"

स्वर कुमार विशु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।