गोगा जी का धाम बड़ा प्यारा

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॥ पावन पाठ ॥

गोगा जी का धाम बड़ा प्यारा मिल गया सहारा आके यहाँ रे,

बाबा से मिले है सहारा अज़ब है नजारा देखा यहाँ रे,

गोगा जी का धाम बड़ा प्यारा मिल गया सहारा आके यहाँ रे,

जी करता है हे गोगा पीर तेरे दर में जाऊ,

दर पे तेरे आके अपना शीश मैं भी झुकाउ,

तेरा आशीष पाने को कुमकुम का देखो टिका किया रे,

गोगा जी का धाम बड़ा प्यारा मिल गया सहारा आके यहाँ रे,

रस्ते यहाँ के टेड़े मेढे फिर भी थकान नहीं लगदी,

याहा पे आने लगते है उड़ने जिनको उड़ान नहीं मिलती,

जो भी ख्वाब लेके आया मन में मैं अपने पूरा किया रे,

गोगा जी का धाम बड़ा प्यारा मिल गया सहारा आके यहाँ रे,

परदेशी है यहाँ है गोगा जी बात यही दोहराता,

भगतो से गोगा पीर का जन्म जन्म का नाता,

जिसने ध्यान तेरा लगाया उसने सब पाया आके याहा रे,

गोगा जी का धाम बड़ा प्यारा मिल गया सहारा आके यहाँ रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।