दादी की कोठी

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॥ पावन पाठ ॥

झुंझनू नगरी माहि माहरी दादी की कोठी,

हो सारी दुनिया जान गई है ये सेठानी है मोटी,

सेठानी मोटी या सेठानी मोटी,

हो सारी दुनिया जान गई है ये सेठानी है मोटी,

बाहरे मंड में सखियाँ सेहलियाँ माह मंड में दादी,

पितेश्वर के सागे जो पूजे है बड़ो भड़ भागी,

बाबा तन धन में नमन करा कोटि को कोटि,

हो सारी दुनिया जान गई है ये सेठानी है मोटी,

ओड बड़े संसार माहि थारो एक सहारो,

थारे सत से छायो है सरे जग में उजारो,

तेखे दर पे देख ले है चमके किस्मत खोटी

हो सारी दुनिया जान गई है ये सेठानी है मोटी,

सतियाँ की सिर मोर कहावे,

कलयुग की महारानी,

सुख दुःख में राखे भगता पे दादी जी निगरानी,

खावे थारे भरोसे श्याम प्रेम से दाल रोटी,

हो सारी दुनिया जान गई है ये सेठानी है मोटी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।