सुने घर के कोने

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुने घर के कोने,

सुने सुने खिलोने,

कब से खड़ी तेरे द्वार में,

मैया शेरावाली भर दे खाली झोली,

एक ही सपना मैं हर रोज सजाती हु,

कितने वर्षो से मैं लोरियां गाती हु,

फिर भी कबसे है सुनी पलने ये की डोरी,

भर दे खाली झोली

सुने घर के कोने,

सुने सुने खिलोने,

कब से खड़ा तेरे द्वार में,

जब जब रंगो का त्यौहार ही आता है,

एक सवाल ही बार बार मड़राता है,

पिचारी लेकर कौन उस से खेले गा होली,

भरदे खाली झोली,

सुने घर के कोने,

सुने सुने खिलोने,

कब से खड़ी तेरे द्वार में,

पतजड़ में भी डाली पे फूल खिलता है,

माँ तेरे दरबार में उतर मिलता है,

कब से तड़प है कब सुन पाए तितली भोली,

भरदे खाली झोली,

सुने घर के कोने,

सुने सुने खिलोने,

ताने सुन के लोगो के थक जाती है,य

तू जाने नैन मेरे क्यों भर आते है,

किस्मत यु कब तक खेलती रहे आँख मिचोली,

भरदे खाली झोली,

सुने घर के कोने,

सुने सुने खिलोने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।