तुम्हारी मोहब्बत की रोशनी से

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॥ पावन पाठ ॥

तुम्हारी मोहब्बत की रोशनी से हुए उजाले ओ बाबा ऐसे,

आई बहारे जीवन में मेरे है प्यारे हम भी तो तेरे जैसे,

तुम्हारी मोहब्बत की रोशनी से....

बगे तुम्हारी जे ज़िंदगी भी,

जैसे हो प्यासा कोई पपीहा,

तुम्हारे अलफ़ाज़ लवो पे इसको,

बया करे तो करे भी कैसे,

तुम्हारी मोहब्बत की रोशनी से

जो वक़्त गुजरे यादो में तेरी,

वो वक़्त होते है आबाद सारे,

नजर रूहानी जो हमने पाई,

महके गुणों का चमन हो जैसे,

तुम्हारी मोहब्बत की रोशनी से....

आई बहारे जीवन में मेरे,

है प्यारे हम भी तेरे जैसे,

तुम्हारी महोबत की रोशनी से....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।