दादी के चरणों में आसूँ

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॥ पावन पाठ ॥

दादी के चरणों में गिरकर आसूँ मोती बन जाते,

हो जाते बेकार अगर ये कही और बह जाते,

दादी के चरणों में गिरकर आसूँ मोती बन जाते,

घुट कर अंदर अंदर जब दिल का दर्द उबलता है,

बाँध तोड़ कर पलको के आंसू का दरिया बेहता है,

बह जाते है आंसू पर इनको हल्का कर जाते,

दादी के चरणों में गिरकर आसूँ मोती बन जाते,

उसके आगे क्या रोना जो मोल न आंसू का जाने,

अंतर् मन की पीड़ा केवल अंतर यामी जाने,

बोल नहीं सकते जो हम कुछ वो आंसू कह जाते,

दादी के चरणों में गिरकर आसूँ मोती बन जाते,

ममता मई दादी माँ सु को देख पिगल जाती,

लाल के बहते आंसू में उसकी करुणा भी बह जाती,

माँ की गोद से जयदा बचे और कहा सुख पाते,

दादी के चरणों में गिरकर आसूँ मोती बन जाते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।