छूप छूप रोते है कन्हियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राज पाठ और ठाट बाट के पीछे याद तड़पती है,

राज पाठ के ठाट बाठ में गाइया याद आती है,

छूप छूप रोते है कन्हियाँ जब मइया याद आती है,

दास दासियाँ हाथ बांध कर खड़े हए है सामने,

लेकिन वो आनंद कहा जो था अंचल की छाव में,

मीठी लोरी वो मइया की रोज सुलाने आती है,

छूप छूप रोते है कान्हा.....

ग्वाल सखा और खेल तमाशे चोरी खाना वो माखन,

मोह न छूटे उन गलियों से जिन में बीता है बचपन,

बलदाऊ की वो गल बहियाँ आँखे नम कर जाती है,

छूप छूप रोते है कान्हा

वो राधा के नैनो से बहती प्रेम की अविरल वो धरा,

श्याम हमेशा रीनी रहे गा हे राधा रानी तुम्हारा,

बरसाने की गोपुर रूविया अंतर् मन छुप जाती है

छूप छूप रोते है कान्हा

वृद्धावन से बिछड़े कन्हियाँ रंक हुए महाराज वही,

सब कुछ है पर कुछ भी नहीं है,

अपने जो है साथ वही,

वीटी लम्हो की वो छया दिल को बहुत सताती है,

छूप छूप रोते है कान्हा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।