महिमा दरबार की क्या बखानू दादी

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

महिमा दरबार की क्या बखानू दादी,

तेरे चरणों पे जाऊ बलिहारी दादी,

महिमा दरबार की क्या बखानू दादी,

लाखो आये दर पे तेरे दुखड़े तूने मिटाये,

तेरे पर्चे दुनिया को सुनाऊ दादी,

तेरे चरणों पे जाऊ बलिहारी दादी,

कोई चुनार लाल उड़ावे,

चूड़ा कोई पहनावे,

मैं तो भाव की भेट चड़ाउ दादी,

तेरे चरणों पे जाऊ बलिहारी दादी,

शृंगार तेरा प्यारा सलोना,

रूप का तेरे क्या कहना,

तेरे दर्शन मैं रोज ही पाउ दादी,

तेरे चरणों पे जाऊ बलिहारी दादी,

ना जानू मैं जप तप साधन,

ना जणू कैसी भक्ति,

मीठे भजनो से तुम को रिजाऊ दादी,

तेरे चरणों पे जाऊ बलिहारी दादी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।