शिरडी वाले साई तेरी मेहरबानी

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॥ पावन पाठ ॥

हो तुम से मिल के बदल गई मेरी ज़िंदगानी,

शिरडी वाले साई तेरी मेहरबानी,

संग तू है तो लगती है दुनिया सुहानी,

शिरडी वाले साई तेरी मेहरबानी,

जब से जुड़े है मेरे प्रीत के धागे,

सोये नसीब मेरे तब से ही जागे,

सारी दुनिया ही जाने है मेरी कहानी,

शिरडी वाले साई तेरी मेहरबानी,

भटके रहा था मैं इधर उधर ही,

अपना बना के तूने मेरी कदर की,

मेरी कीमत है क्या बस तू ने ही जानी,

शिरडी वाले साई तेरी मेहरबानी,

आंखो मे मेरे कभी आंसू जो आये,

पास ही पाया तुझे हम मुस्काये,

संग छूटे न तेरा मेरा शिरडी के स्वामी,

शिरडी वाले साई तेरी मेहरबानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।