तेरी शिक्षाए और प्यार साथी बन साथ निभाते है

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी शिक्षाए और प्यार साथी बन साथ निभाते है,

मधुवन के वो दिन रात बाबा तेरी याद दिलाते है,

तेरी शिक्षाए और प्यार साथी बन साथ निभाते है,

बेठू कमरे में जाके, मिलता तू वत्सल से आके,

होते है निहाल ये नैना बाबा तुझे सामंने पाके,

तेरे मीठे मीठे बेन कानो में आज भी आते है,

तेरी शिक्षाए और प्यार साथी बन साथ निभाते है,

चलते फिरते यु लागे तू संग को जैसे हमारे,

भगियां में कभी कुटियाँ में करे तेरे अनुभव न्यारे,

मधुवन के कण कण में तेरा ही नजारा पाते है,

तेरी शिक्षाए और प्यार साथी बन साथ निभाते है,

तेरे कदमो के निशान हमें तेरी राह दिखाये,

संसार में सबकी सेवा करने का पथ पढाये,

तूने जो दिखाई राह हम उसपे चलते जाते है,

तेरी शिक्षाए और प्यार साथी बन साथ निभाते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।