धुन जो भेरू की लगाए

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॥ पावन पाठ ॥

धुन जो भेरुकी जगाये,

वो पारस प्रभु को पाये ,

आजा प्यारे पास भेरुके,

काहे घबराये काहे घबराये,

भेरू मेरा दयालु ,

भक्तों के लिए कृपालु,

जिसके सर पे हाथ रखदें,

चमके किस्मत उसकी ,

सुन सुन अरे बेटा सुन ,

इसकी भक्ति में बड़े बड़े गुण,

लाख दुखों की एक दवा है ,

क्यों न आजमाये ,

काहे घबराये काहे घबराये,

घर का होवे झगड़ा,

या बिजनस का हो रगडा,

सब कष्टों का बोज हटे ,

जब हाथ फिरे भेरुका ,

सुन सुन अरे बाबू सुन ,

इसकी भक्तिमें बड़े बड़े गुण,

लाख दुःखोंकी एक दवा है ,

क्यों न आजमाये ,

काहे घबराये काहे घबराये,

नौकर हो या मालिक ,

लीडर हो या पब्लिक ,

भेरुके आगे सभी झुके है,

क्या राजा क्या सैनिक ,

सुन सुन अरे राजा सुन ,

इसकी भक्तिमें बड़े बड़े गुण,

क्यों न आजमाये ,

काहे घबराये काहे घबराये,

धुन जो भेरुकी जगाये ,

वो पारस प्रभु को पाये ,

आजा प्यारे पास भेरुके,

काहे घबराये काहे घबराये,

ॐ ह्रीं श्रीं नाकोड़ा पार्श्वनाथाय नमः,

ॐ ह्रीं श्रीं नाकोड़ा भैरवाय नमः,

UPLOADED BY

GANESH R. सिंघवी

9967805150

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।