सखी मैं दीवानी हो गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुरली बजाने रास राचने आये हैं मेरे श्याम,

सखी मैं दीवानी हो गई,

मोर मुकुट सोहे, कान में कुंडल,

श्यामल वर्ण, चंद्र मुख मंडल,

कंठ में माला, भुजा विशाला,

देख के उसका, रूप निराला,

मैं तो बिकी बिन दाम, सखी मैं......

मोहिनी सूरत, बदन गठीला,

है चितचोर ये, छैल छबीला,

नज़रें मिला के, दिल को चुरा के,

प्रेम के झूठे, ख्वाब दिखा के,

कर दे नींद हराम, सखी में.....

पाऊं में पैजनियां करे रुनझुन,

गूंज उठे जब मुरली की धुन,

लव कुश गायें, सब को सुनायें,

"दास" लिखे जो कलाम, सखी में दीवानी...

रचना अशोक शर्मा "दास"

स्वर लव कुश

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।