तेरे नाल प्रीता पकियां

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरे नाल प्रीता पकियां सोहना मुखड़ा तक दियां अखियाँ,

ना चरना च साईं मेनू दूर करी,

इस कमली दा प्यार साईं मंजूर करी,

तेरे नाल प्रीता पकियां....

मेतो जग रुसियाँ मेनू जग तो कुछ भी नही लेना,

जे तू रुसियाँ ते साइयां बिछोड़ा नही सहना,

मेरी पूजा दे फूल साइयां हूँ सवीकार करी,

हूँ इस कमली दा प्यार साईं मंजूर करी

इस दुखयारी नु चरना विच साईं था देवी,

डुबदे वेले तू कमली विच छुपा लेवी,

मैं तेरी होगी तू ही दुःख मेरे दूर करी,

हूँ इस कमली दा प्यार साईं मंजूर करी

मैं प्यार तेरे दे विच सबनू साईं भुला बेठी,

सो रब दी साइयां तेनु दिल च बसा बेठी,

हाथ जोड़ जोड़ के आखा माफ़ कसूर करी,

हूँ इस कमली दा प्यार साईं मंजूर करी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।