मेरे सर ते तेरा हत्थ होवे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सर ते तेरा हत्थ होवे,

जेकर मेरी तैनू पत् होवे

क्यूँ ना भव सागर तर जावन मैं

जिंदडी नू घोल गुमावां मैं

मेरा दुनिया दे नाल प्यार नहिओ

चंगा लगदा एह संसार नहिओ

जे कर श्याम मेरा एइत्बार नहिओ

आजा दिल नू चीर दिखावा मैं

जिन्ना राहां तो सतगुरु लंघ आवे

जिन्ना राहां तो प्यारा लंघ आवे

ओहना राहां तो सदके जावां मैं

जिंदडी नू घोल गुमावां मैं

पई शिला लूणी चटनी आ

मैं तां राम राम पई रटनी आ

कोई जा के कहो प्रीतम प्यारे नू

आजा दिल नू चीर दिखावा मैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।