आए हैं शरण तेरी गुरुदेव कृपा कर दो

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॥ पावन पाठ ॥

आए हैं शरण तेरी, गुरुदेव कृपा कर दो।

इस दीन दुखी मन में आनंद सुधा भर दो॥

दुनिया से हार कर के अब द्वार तेरे आया।

श्रद्धा के सुमन चुनके सद्भाव से हूँ लाया।

करुणा का हाथ सर पर हे नाथ मेरे धर दो॥

अनजानी मंजिल है, चहु दिशा है अंधिआरा।

करुणा निधान अब तो बस है तेरा सहारा।

टूटी मन वीणा में मेरे भक्ति का स्वर भर दो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।