जय हो तुम्हारी महाँकाल भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिप्रा के तट भोले नाचे छमाछम,

उज्जैन नगरी भी बोले बमाबम,

जय हो तुम्हारी महाँकाल भोले,

डमरू बजाते घुँगरू बजाते,

तांडव दिखाते महाँकाल भोले,

जय हो तुम्हारी महाँकाल भोले.....

शंकर जी नाचे, मैय्या हरसिद्धि नाचे,

चिंतामन बाबा गजानंद नाचे,

नाच रही हे मैय्या शिप्रा भवानी,

कल-कल हे बहती कल धार भोले,

जय हो तुम्हारी महाँकाल भोले......

सारे ही तन भोले भस्मी रमाये,

मुंडो की माला गले में सजाये,

नाग भी लिपटे हे बाबा के काले,

अनुपम हे रूप तुम्हारा भोले,

जय हो तुम्हारी महाँकाल भोले......

फैल गई बाबा शिव की जताए,

लगती है जैसे वो काली घटाए,

गंगा भी माथे पे झूम रही है,

खुशिया है मन में अपार भोले,

जय हो तुम्हारी महाँकाल भोले

चलो रे शिव के तट पर हम जाए,

भोले ले चरणों की धूलि उठाये,

माथे लगा लो ये पवन है माटी,

कर देंगे बाबा निहाल भोले,

जय हो तुम्हारी महाँकाल भोले

श्री गजानंद जागरण ग्रुप उज्जैन म. प्र.,

८१०९६३०६७३

९९२६८३४५६३

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।