लाखों प्राणी तार दिए

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

लाखों प्राणी तार दिए सुनते हैं सरकार,

छोटी सी ये अर्ज मेरी,कर लेना स्वीकार,

अंत समय जब आये मेरा ..ओ..ओ..ओ.....

वो पूनम की शाम हो,

लब पे तेरा नाम हो,बस तेरा नाम हो,

भक्ति तेरी करते करते,हम तुझमे ही खो जाये,

ये जीवन की ज्योत तेरे, चरणों मे ही समा जाये,

बिन मतलब के इस जीवन का..ओ...ओ...ओ...

कुछ ऐसा अंजाम हो,

लब पे तेरा नाम हो,बस तेरा नाम हो।।

सन्मुख तेरा चेहरा हो,जब प्राण निकलने को आये,

तेरे चरणों मे ओ दादा,सर रखकर हम सो जाए,

थोड़ी सी जो सेवा कि हो ..ओ...ओ...ओ...,

उसका ये अंजाम हो,

लब पे तेरा नाम हो,बस तेरा नाम हो।।

धर्म नाम की चादर तन पे,अंतिम वस्त्र हमारा हो,

मुख मेरा जब भी खुले ,नवकार का नारा हो,

खो जाऊँ जब पंच तत्व में...ओ...ओ...ओ...,

मालोणी वो धाम हो,

लब पे तेरा नाम हो,बस तेरा नाम हो,

लाखों प्राणी तार दिए ,सुनते हैं सरकार,

छोटी सी ये अर्ज मेरी,कर लेना स्वीकार,

अंत समय जब आये मेरा....ओ..ओ...ओ...

वो पूनम की शाम हो,

लब पे तेरा नाम हो,बस तेरा नाम हो।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।