पर्वत ज्योति लहराई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत ज्योति लहराई,जै हो तेरी ज्वाला माई

तू सबके मन को भायी ,जै हो तेरी ज्वाला माई,

धरती से निकली ज्वाला,भक्तो पे जादू डाला,

पवन चले या पुरवाही,जै हो तेरी ज्वाला माई,

तेरे भवन पर मेले हैं,भक्त तेरे अलबेले हैं,

तूने लीला दिखलाई ,जै हो तेरी ज्वाला मैं,

तू गुल मे गुल्ज़ारो मे,तू रंगीन बहारो मे ,

ये दुनिया तूने महकाई,जै हो तेरी ज्वाला माई,

ये पलक जपे तेरी माला,माँ कर जीवन मे उजियारा,

तू सबके मन को भई,जै हो तेरी ज्वाला माई.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।