तुम सामने बैठे हो बाबा

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॥ पावन पाठ ॥

तुम सामने बैठे हो बाबा हम देख रहे मन दर्पण में,

दुनिया ढूंढे तुम्हे कण कण में हम मिलन मनाते मधुवन में,

तुम सामने बैठे हो बाबा हम देख रहे मन दर्पण में,

ना तन को तड़पाया हम ने ना घर वारि छोड़े के जंगल को गए,

जिस रह पर ब्रह्मा बाबा चले उस राह पर हम भी चल पड़े,

बाबा तुमने मुझे मीरा कहा हम खुश हो रहे अंतर मन में,

तुम सामने बैठे हो बाबा हम देख रहे मन दर्पण में,

तेरी छतर छाया के निचे हम खुद को सुरक्षत पाए है,

बाकी ममता तुम से ही मिली प्यार पिता का पाए है,

तुम भूल से भी भूल सकते नहीं एहसान है इतने जीवन में,

तुम सामने बैठे हो बाबा हम देख रहे मन दर्पण में,

तीनो लोको की सैर करे जब चाहे आये जाए हम,

तेरी महिमा के गीत हम सब ही बाबा हम हर पल ही गाये,

जन्मो की प्यास भुजी दिल की पहचान मिली जब संगम में

तुम सामने बैठे हो बाबा हम देख रहे मन दर्पण में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।